इटली की पीएम मेलोनी को पहला बड़ा झटका, 2027 में होना है संसदीय चुनाव

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इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की न्यायिक सुधार की अपील को जनमत संग्रह में स्वीकृति नहीं मिली. हां कैंप को मिले 46.5 प्रतिशत मतों के मुकाबले 53.5 फीसदी मत पाकर नहीं खेमा जीत गया. अनुमान से कहीं ज्यादा, तकरीबन 59 फीसदी लोगों ने जनमत संग्रह में हिस्सा लिया. नतीजा आने के बाद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, इटैलियन लोगों ने फैसला ले लिया है और हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं. जनमत संग्रह से पहले भी यह सवाल बना हुआ था कि क्या हारने पर मेलोनी पद छोड़ देंगी. उन्होंने इस संभावना से इनकार किया है. अक्टूबर 2022 में सत्ता में आने के बाद से मेलोनी की स्थिति काफी मजबूत रही है. वह इटली की सबसे स्थिर सरकारों में से एक का नेतृत्व कर रही हैं और एक तरह से उनकी छवि अपराजेय जैसी रही है. जनमत संग्रह उन्हें मिला पहला बड़ा झटका है. इटली में विपक्षी दल नो कैंप में थे. रेफरेंडम के नतीजे से उन्हें बल मिला है. कई राजनीतिक विश्लेषक भी नतीजे को मेलोनी की राजनीतिक अपील से जोड़कर देख रहे हैं. दानिएल अलबेरतात्सी, यूनिवर्सिटी ऑफ सरे में राजनीति के प्रोफेसर हैं. उन्होंने एएफपी को बताया, यह मेलोनी के लिए बुरा नतीजा है. इसका मतलब है कि अपने मेनिफेस्टो के एक बड़े मुद्दे पर उन्होंने इटैलियन मतदाताओं का समर्थन खो दिया है. पिछले 30 साल से यह दक्षिण धड़े के भी प्रमुख प्रस्तावों में से एक था. रेफरेंडम में जीतकर मेलोनी जजों और प्रॉसिक्यूटरों की भर्ती और उनके कामकाज के तरीकों में बदलाव लाना चाहती थीं. उनका आरोप है कि न्यायपालिका में वामपंथी रुझान है और उसका राजनीतिकरण किया जा रहा है. मनमुताबिक नतीजा ना मिलने पर भी फिलहाल सरकार गिरने का कोई खतरा नहीं है. मगर, अगले साल इटली में संसदीय चुनाव होने हैं, जहां रेफरेंडम का फैसला भी भूमिका निभा सकता है.(dw.com/hi)
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