ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा, अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने के लिए फेक न्यूज का इस्तेमाल किया गया है. ट्रंप के दावों के मद्देनजर ईरानी संसद के एक सदस्य ने भी चेताया है कि उनके देश को समझदारी से विचार करना चाहिए.
ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने इस्माइल कोवसारी का बयान छापा है, ट्रंप, नेतन्याहू और इन जैसे स्वाभाविक झूठे हैं और उनका स्वभाव बांटना है. हमें समझदारी से सोचना चाहिए. उनका स्वभाव फूट डालना है, ताकि वो लोगों में अधिकारियों के लिए अविश्वास जगाएं और लोग सोचें कि ये चीजें हुई हैं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं हुई है. कोवसारी, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के दफ्तर ने बताया कि वे इस हफ्ते अजरबैजान, मिस्र, ओमान, पाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया, तुर्की और तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्रियों से बात कर रहे हैं. ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के औचक हमले शुरू करने से पहले, तेहरान और वॉशिंगटन में वार्ता हो रही थी. पिछले साल जब ईरान के साथ 12 दिन का युद्ध शुरू हुआ, उससे पहले भी दोनों पक्षों में बातचीत हो रही थी.
होरमुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को दी गई मोहलत डॉनल्ड ट्रंप ने क्यों बढ़ाई, इसपर भी कयास लगाए जा रहे हैं. न्यूयॉर्क स्थित एक थिंक टैंक सूफान सेंटर ने अपने विश्लेषण में लिखा है कि समससीमा को आगे बढ़ाना अमेरिकी मरीन्स के क्षेत्र में पहुंचने से जुड़ा हो सकता है.
विश्लेषण के मुताबिक, जैसा कि ट्रंप पहले भी कर चुके हैं, मुमकिन है वे मिलिट्री एसेट्स को क्षेत्र में पहुंचा रहे हों. इस मामले में, खर्ग द्वीप पर हमला करने और उसपर कब्जा करने के लिए. इस दौरान, वार्ता को एक कवर की तरह इस्तेमाल करना तब तक, जब तक कि वो एसेट्स लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार ना हो जाएं.(dw.com/hi)