-आलोक पुतुल
बस्तर के चर्चित माओवादी नेता पापा राव ने मंगलवार को आत्मसमर्पण कर दिया है. सुकमा के किस्टारम इलाके में पैदा हुए, दोरला जनजाति के पापा राव के साथ 17 दूसरे माओवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया है.
पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, पापा राव ने एक मध्यस्थ के माध्यम से पिछले पखवाड़े संपर्क किया था. इसके बाद हमने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए राजी किया और भरोसा दिया कि मुख्यधारा में लौटने पर उनका स्वागत होगा. पापा राव के आत्मसमर्पण के बाद, अब इस इलाके में कोई भी बड़ा नक्सली नहीं बचा है.
सीपीआई माओवादी के पश्चिम एरिया कमेटी के प्रमुख, 55 वर्षीय पापा राव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, सरकार की पुनर्वास नीति मुझे अच्छी लगी, इसलिए मैंने हथियार छोड़ने का फैसला किया.
बस्तर के स्थानीय माओवादियों में माड़वी हिड़मा के बाद, पापा राव सबसे चर्चित नाम रहा है और पिछले 20 सालों में छत्तीसगढ़ में हुई कई हिंसक घटनाओं में पापा राव का नाम जुड़ा रहा है.
पिछले दो सालों में पापा राव उर्फ़ सुनम चंद्राया उर्फ़ मंगू दादा उर्फ़ चंद्रन्ना के मुठभेड़ में मारे जाने की खबरें कई बार सामने आई थीं. लेकिन हर बार यह खबरें गलत साबित हुईं.
राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने पापा राव के आत्मसमर्पण पर कहा, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के स्तर का अब कोई भी कमांडर नहीं बचा है. हमारे छत्तीसगढ़ में 40 से 45 कुल नक्सली बचे हैं, जो एरिया कमेटी मेम्बर हैं. उनसे ऊपर का कोई नहीं बचा है.
उन्होंने कहा, बाकी बचे नक्सली भी वापस आएंगे. मैं कह सकता हूं कि आने वाले दो-चार दिनों में, 31 मार्च तक समूचे छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा.(bbc.com/hindi)