वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए सरकार ने बढ़ाई निगरानी

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भारत के दवा नियामक ने वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री और प्रचार के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 मार्च को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी. इसके मुताबिक, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देशभर में 49 जगहों का निरीक्षण किया. इनमें दवा के थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और वजन घटाने वाले क्लीनिक शामिल हैं. भारत की कई दवा कंपनियों ने हाल ही में वजन घटाने वाली सस्ती दवाएं लॉन्च की हैं. इनकी कीमत नोवो नॉर्डिस्क के डायबिटीज ड्रग ओजेंपिक और वजन घटाने वाली दवा वीगोवी के मुकाबले 70 फीसदी तक कम है. ये दवाएं सेमाग्लूटाइड इंग्रेडिएंट पर आधारित हैं, जिसके पेटेंट की समयसीमा भारत में पिछले हफ्ते खत्म हो चुकी है. यानी, अब दवा कंपनियों को इसका इस्तेमाल कर दवा बनाने की अनुमति मिल चुकी है. ऐसी दवाएं लॉन्च करने वाली भारतीय कंपनियों में सनफार्मा, डॉ रेड्डी, जायडस, टोरेंट, ग्लेनमार्क और एल्केम शामिल हैं. ज्यादातर कंपनियों ने सेमाग्लूटाइड को इंजेक्शन के रूप में लॉन्च किया है. इन दवाओं की महीनेभर की खुराक के लिए 1,300 से लेकर 8,000 रुपये तक खर्च करने होंगे. हालांकि, दवाओं को डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही लिया जा सकता है.(dw.com/hi) स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इन दवाओं को उचित चिकित्सकीय निगरानी के बिना लेने से गंभीर दुष्प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं. इससे पहले दवा नियामक ने फार्मा कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे वजन घटाने वाली दवाओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार न करें.
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