खैरागढ़-कवर्धा और बालाघाट-गोंदिया में एक भी नक्सली सक्रिय नहीं
प्रदीप मेश्राम
राजनांदगांव, 25 मार्च (छत्तीसगढ़ संवाददाता)।नक्सलियों के खिलाफ सालभर पहले शुरू हुआ सुरक्षाबलों के अभियान के बाद महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ यानी एमएमसी जोन में अब गिनती के नक्सली रह गए है।
एक साल पहले एमएमसी जोन में 150 से ज्यादा सशस्त्र नक्सली जंगलों में पुलिस और सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए थे। केंद्र सरकार के मार्च-2026 तक नक्सलियों के सफाए का लक्ष्य लेकर शुरू हुआ ऑपरेशन नक्सल संगठन पर भारी पड़ा। नतीजतन एमएमसी जोन के कुख्यात और करोड़ो के इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण का रूख किया। वही कुछ नक्सली मुठभेड़ में मारे गए। साथ ही कुछ की कुदरती मौत भी हुई। एक साल पहले नक्सलियों का एमएमसी जोन में खौफ था। बताया जाता है कि शीर्ष नक्सल नेताओं के सरेंडर करने के बाद सीसी मेंबर और डीवीसी मेंबरों ने निचले कैडर के नक्सलियों के साथ समर्पण का रास्ता अख्तियार किया।
एमएमसी जोन में अब सालभर के ऑपरेशन के बाद खैरागढ़, कवर्धा और राजनांदगांव जिलें में सक्रिय नक्सली नही रह गए है। वही मध्यप्रदेश के बालाघाट में भी नक्सल समस्या बीते जमाने की बात बनकर रह गई। इसी तरह महाराष्ट्र के गोंदिया जिलें में भी नक्सलियों की संख्या खत्म हो गई। इधर मोहला-मानपुर और गढ़चिरौली जिलें में 6-6 नक्सली अब भी हथियार लेकर जंगल में घूम रहे है। बताया जाता है कि दोनों जिलें के नक्सलियों को घेरने और आत्मसमर्पण की कोशिश लगातार की जा रही है।
इस संबंध में गढ़चिरौली नक्सल ऑपरेशन डीआईजी अंकित गोयल ने छत्तीसगढ़ से कहा कि एमएमसी जोन में बचे हुए नक्सलियों की तलाश और समर्पण को लेकर पुलिस का प्रयास जारी है। गढ़चिरौली में 6 नक्सलियों की वापसी के लिए अलग-अलग स्तरों पर कोशिश की जा रही है। इस बीच मोहला-मानपुर में बचे हुए नक्सलियों को लेकर पुलिस जंगल में ऑपरेशन कर रही है। 31 मार्च की मियाद पूरा होने में सिर्फ सप्ताहभर का वक्त रह गया है। ऐसे में पुलिस बचे हुए नक्सलियों की खोजबीन में जमीन आसमान एक रही है।